सबाल तो बहुत है, पर हल मुझॆ पत्ता नहीं,
कहाँ मिलेगी रास्ता, जब मंजिल मुझॆ पत्ता नहीं,
क्यॊ है ऎसी बॆचैनी, जवाब मुझॆ मिला नहीं,
क्या है जो मुझॆ कुछ करना, जो मै नहीं कर रहा,
क्या है जिस से मुझॆ लड्ना है, कोइ मुझॆ दिखा नहीं
सबाल तो बहुत है, पर हल मुझॆ पत्ता नहीं,
कहाँ मिलेगी रास्ता, जब मंजिल मुझॆ पत्ता नहीं,
क्यॊ है ऎसी बॆचैनी, जवाब मुझॆ मिला नहीं,
क्या है जो मै कर रहा हू,
क्या है जो मुझॆ करना है,
क्या है जो मुझॆ करना चाहिये,
कुछ भी मुझॆ पत्ता नहीं
सबाल तो बहुत है, पर हल मुझॆ पत्ता नहीं,
कहाँ मिलेगी रास्ता, जब मंजिल मुझॆ पत्ता नहीं,
क्यॊ है ऎसी बॆचैनी, जवाब मुझॆ मिला नहीं,
क्या है जो वो बोल रहा, और मैने सुना नहीं
क्या है जिन्दगी सोच रखा,
क्या मुझॆ रोक रहा,
क्या मुझॆ थाम रहा,
कुछ मुझॆ पत्ता नहीं
सबाल तो बहुत है, पर हल मुझॆ पत्ता नहीं,
कहाँ मिलेगी रास्ता, जब मंजिल मुझॆ पत्ता नहीं,
क्यॊ है ऎसी बॆचैनी, जवाब मुझॆ मिला नहीं,
कौन मेरे साथ है, बोल रह क्या बात है वोह,
क्या है उसका इशारा, समझन नहीं आ रहा,
क्या है सामने पडा हुआ, जो मुझॆ दिख नहीं रहा
सबाल तो बहुत है, पर हल मुझॆ पत्ता नहीं,
कहाँ मिलेगी रास्ता, जब मंजिल मुझॆ पत्ता नहीं,
क्यॊ है ऎसी बॆचैनी, जवाब मुझॆ मिला नहीं,
क्या है ऐसी जिन्दगी, कि दर भी नहीं, और खुशी भी नहीं,
क्या है यह राज, जो सामने पडा पर खुली नहीं
पकडी हुइ है बाहे, पर खुली नहीं है राहे,
खुली हुइ है आँखॆ, पर काली भरी है आगे
सबाल तो बहुत है, पर हल मुझॆ पत्ता नहीं,
कहाँ मिलेगी रास्ता, जब मंजिल मुझॆ पत्ता नहीं,
क्यॊ है ऎसी बॆचैनी, जवाब मुझॆ मिला नहीं
राम मनोहर साह
17th Feb, 2006