Posted by rammanohar on August 14, 2006
दौड रहा है हर कोई,
मुकाम है न आगे कहीं,
एक सन्नाटा है कहीं !!
लडे झगडे है हर कोई,
रहगए लेकिन खाली मुठ्ठी,
एक सन्नाटा है कहीं !!
बोल रहा है हर कोई,
पहुच न पाईँ आवाज कहीं,
एक सन्नाटा है कहीं !!
देख रहा है हर कोई,
खुद को पहचाना कभी नहीं,
एक सन्नाटा है कहीं !!
सो रहीं है हर कोई,
बेचैन मन है और कहीं,
एक सन्नाटा है कहीं !!
पोथी पढे है हर कोई,
सुल्झा न पाईँ रहस्यमय गुथ्थीं,
एक सन्नाटा है कहीं !!
राम मनोहर
14 Aug 2006
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Posted by rammanohar on August 10, 2006
रिश्ते इतने कमजोर नहीं होते
कच्चे धागे के डोर नहीं होते
कि, हलकी नोकझोंक मे टूट जाये !!
रिश्ते इतने कमजोर नहीं होते
सूखे पत्ते के छोर नहीं होते
कि, हलकी हवा से अलग हो जाये !!
रिश्ते इतने कमजोर नहीं होते
ताश के बने घर नहीं होते
कि, हलकी हलचल मे बिखर जाये !!
रिश्ते इतने कमजोर नहीं होते
रेत के बने महल नहीं होते
कि, हलकी बरिश मे बह जाये !!
राम मनोहर
15 July 2006
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Posted by rammanohar on August 10, 2006
आज इतने रंगीन फिजा है
इस्क मे बेह्क जाने को दिल करता है !!
भरी पडीं है मैयखाना
मदिरा के प्याला मे डुब ने को जी करता है !!
नशे मे है सारी दिशाये
मैयखाना मे पिघलजाने को मान मचलता है !!
नाच रही है मैहफिल
बैंहकी फिंजा मे झुमने को दिल करता है !!
आँखे ढूढ रहीं है किसी को
हूस्न के बाहो मे मचल्ने को दिल करता है !!
कबतक हम ऐसे बचते रहेंगे
किसी शमा के हातो लुटने को दिल करता है !!
राम मनोहर
15 July 2006
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Posted by rammanohar on August 10, 2006
दर्द है यह तुम्हारा
तुम्हारा कोइ दोष नहीं !!
नशे मे रहता हूँ हमेशा
अब तो कोइ होश नहीं !!
बचेगी कैसे यह चोरी
नशे कि लत मुझको पडी !!
कटेगीं कैसे यह घड़ी
तुम्हारी यादे है सिर चढी !!
छोडू मै कैस यह यादे
जीना है मुझको आगे !!
राम मनोहर
10-August-2006
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