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Archive for November, 2006

दबी जुबांन !! Dabe Juwan

Posted by rammanohar on November 21, 2006

Few lines

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कल ही तो हम ने खुदखुसी की,
आज फिर से करना है,
पत्ता नहीं कबतक, हम अपना कत्त्ल करेंगे ।।
हे ऊपर बाले, रोज जिंदा करते क्यो हो ।।

जिंदा रहेंगे कैसे, जब हरेक दिन मरना पडं रहा है,
कोइ तो बतायें, जिन्दगी जिने की है या मरने की?

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जिसने कभी दोस्त की एहमियत को नही पेहचाना,
आज ऊसे दोस्तो की सहारा की जरूरत है।।

लोकल कल बहुत सस्ती हो गयी है,
एक कल करके हाल चाल पुछ सकती हो।।

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रोता हू तो अब आंसु नहीं आती
कितने निकले ये आंसु, कहीं कल की जरुरत तो नहीं?

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बूंद बूंद जमा, अब बांध बनके बैठा है,
जमिन ऊतना अब ऊंचा नंही, पैर का अब पत्ता नंही
अब तो हम बस तैरते है, नाओ के सहारे ।।

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दर्द दिलमे होती है ।
लेकिन दिमाग मेहसूस करता क्यो है?

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Basant Panchami , February 06, 2006

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रुठ के तुम कहां जाओगी !! Rutha kay tum kaha jaaoge !!

Posted by rammanohar on November 21, 2006

रुठ के तुम कहां जाओगी,
लौट के तुम जरूर आओगी,

भूल हम से हुइ है क्या ऐसा,
जिसकी सजा इतनी बेरूखी जैसा,

सजा जब तुम हमको देती हो,
बन्द कमरे मे तुम क्यों रोती हो,

दर्द तो तुमको भि होती है,
जब जब तुम हमको सताती हो,

सुनहरे दिन जब निकाल जायेंगी,
तब पछ्ताये कुछ लौट नही आयेंगी

Aug 13, 2006

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