Posted by rammanohar on July 26, 2007
सारी अकल सो गया है
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दिल है कि अब ऊब गया है,
सारी तमन्ना सुख गया है,
चाह्ता क्या है भूल गया है,
जिन्दगी कही खो गया है,
सारी अकल सो गया है
जिने कि अब ऊसुल कहा है,
गर्दिस मे कोइ धूल कहा है,
लाईफ मे कोइ अब जूनुन कहा है,
मन कि अब सकून कहा है,
हर हशी मे अब फूल कहा है
Ram Manohar
July 27, 2007
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Posted by rammanohar on November 21, 2006
Few lines
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कल ही तो हम ने खुदखुसी की,
आज फिर से करना है,
पत्ता नहीं कबतक, हम अपना कत्त्ल करेंगे ।।
हे ऊपर बाले, रोज जिंदा करते क्यो हो ।।
जिंदा रहेंगे कैसे, जब हरेक दिन मरना पडं रहा है,
कोइ तो बतायें, जिन्दगी जिने की है या मरने की?
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जिसने कभी दोस्त की एहमियत को नही पेहचाना,
आज ऊसे दोस्तो की सहारा की जरूरत है।।
लोकल कल बहुत सस्ती हो गयी है,
एक कल करके हाल चाल पुछ सकती हो।।
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रोता हू तो अब आंसु नहीं आती
कितने निकले ये आंसु, कहीं कल की जरुरत तो नहीं?
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बूंद बूंद जमा, अब बांध बनके बैठा है,
जमिन ऊतना अब ऊंचा नंही, पैर का अब पत्ता नंही
अब तो हम बस तैरते है, नाओ के सहारे ।।
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दर्द दिलमे होती है ।
लेकिन दिमाग मेहसूस करता क्यो है?
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Basant Panchami , February 06, 2006
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Posted by rammanohar on November 21, 2006
रुठ के तुम कहां जाओगी,
लौट के तुम जरूर आओगी,
भूल हम से हुइ है क्या ऐसा,
जिसकी सजा इतनी बेरूखी जैसा,
सजा जब तुम हमको देती हो,
बन्द कमरे मे तुम क्यों रोती हो,
दर्द तो तुमको भि होती है,
जब जब तुम हमको सताती हो,
सुनहरे दिन जब निकाल जायेंगी,
तब पछ्ताये कुछ लौट नही आयेंगी
Aug 13, 2006
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Posted by rammanohar on October 18, 2006
दर्द ने कसम खाँइ है, मगर हम भीं कोइ कम नहीं !
आसूँ कि नदिया निकालेंगे, मगर मुडेंगे पिछे हम नहीं !
बता देंगे उसको भी, जिने कि बहानें है कम नहीं !
पछाडेंगे दर्द को जरुर एक दिन, है जिंन्दगी के दिन कम नहीं !
कर लो ऐ दर्द जो भी अभी, बचीं नहीं आहट मुँह् कि अब कोइ !
आँसू ने साथ छोंड दिया है मेरा, तु क्या अब बिगाडेंगा अकेला !
ठहैर जाँ थोंडा, बदलने दे दिन थोंडा,
भाग जाएँगा तु भी, साथ नहीं निभा पाएँगा मेरा !
Ram Manohar
Oct 19, 2006
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Posted by rammanohar on August 14, 2006
दौड रहा है हर कोई,
मुकाम है न आगे कहीं,
एक सन्नाटा है कहीं !!
लडे झगडे है हर कोई,
रहगए लेकिन खाली मुठ्ठी,
एक सन्नाटा है कहीं !!
बोल रहा है हर कोई,
पहुच न पाईँ आवाज कहीं,
एक सन्नाटा है कहीं !!
देख रहा है हर कोई,
खुद को पहचाना कभी नहीं,
एक सन्नाटा है कहीं !!
सो रहीं है हर कोई,
बेचैन मन है और कहीं,
एक सन्नाटा है कहीं !!
पोथी पढे है हर कोई,
सुल्झा न पाईँ रहस्यमय गुथ्थीं,
एक सन्नाटा है कहीं !!
राम मनोहर
14 Aug 2006
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Posted by rammanohar on August 10, 2006
रिश्ते इतने कमजोर नहीं होते
कच्चे धागे के डोर नहीं होते
कि, हलकी नोकझोंक मे टूट जाये !!
रिश्ते इतने कमजोर नहीं होते
सूखे पत्ते के छोर नहीं होते
कि, हलकी हवा से अलग हो जाये !!
रिश्ते इतने कमजोर नहीं होते
ताश के बने घर नहीं होते
कि, हलकी हलचल मे बिखर जाये !!
रिश्ते इतने कमजोर नहीं होते
रेत के बने महल नहीं होते
कि, हलकी बरिश मे बह जाये !!
राम मनोहर
15 July 2006
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Posted by rammanohar on August 10, 2006
आज इतने रंगीन फिजा है
इस्क मे बेह्क जाने को दिल करता है !!
भरी पडीं है मैयखाना
मदिरा के प्याला मे डुब ने को जी करता है !!
नशे मे है सारी दिशाये
मैयखाना मे पिघलजाने को मान मचलता है !!
नाच रही है मैहफिल
बैंहकी फिंजा मे झुमने को दिल करता है !!
आँखे ढूढ रहीं है किसी को
हूस्न के बाहो मे मचल्ने को दिल करता है !!
कबतक हम ऐसे बचते रहेंगे
किसी शमा के हातो लुटने को दिल करता है !!
राम मनोहर
15 July 2006
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Posted by rammanohar on August 10, 2006
दर्द है यह तुम्हारा
तुम्हारा कोइ दोष नहीं !!
नशे मे रहता हूँ हमेशा
अब तो कोइ होश नहीं !!
बचेगी कैसे यह चोरी
नशे कि लत मुझको पडी !!
कटेगीं कैसे यह घड़ी
तुम्हारी यादे है सिर चढी !!
छोडू मै कैस यह यादे
जीना है मुझको आगे !!
राम मनोहर
10-August-2006
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Posted by rammanohar on May 10, 2006
उसके घर तु खुशिया भरदे
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किसमत ने रास्ता काटे से है भरे,
हर मोड पर गहरे गडढे है खोदे,
पैरो मे मोटी जंजीर है बेडे,
बन्जर रेगिस्तान मे हमको है छोडे,
धडकती शोले से हमको है घेरे,
पर दर्द अब हमको होता नहीं है
पर अपनो क दर्द जब देखता हूँ,
दर्द उसका जब मेहशुस कर्ता हूँ,
शिसकिआहट दुरसे भि सुनता हूँ,
बेचैनी उसका जब समझता हूँ,
मन ही मन बहुत रोता हुँ
हे ईश्वर, अल्लाह, गँड जो भि हो तुम,
मेरी झोली और काँटो से भरदे,
जिस्म मेरा तु चल्ली करदे,
खून कि हर एक बून्द लेले,
चाहे जितना दर्द तु देदे,
पर उसके घर तु खुशिया भरदे,
बस उसके घर तु खुशिया भरदे
राम मनोहर
10 May 2006
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Posted by rammanohar on May 3, 2006
कौन कैह्ता है तुम कुछ करते हो,
तुम तो ताश के एक पत्ते हो,
समय आने पर निकलते हो
समय सब से बलवान है,
बाकी सब बेईमान है,
दुनिया के रङमन्च मे,
हम एक रोल निभाते है
यह् मत सोचो तुम कुछ करोगे,
हाथ पकड के वोह् करायेगा,
हाथ मे जंजीर लगायेगा,
फिर अपनी चाल चलायेगा
सोचो तुम अभी क्या हो,
जबाब तुम्हे यह् मिलेगा,
तुम तो एक सिक्का हो,
हातो हातो घुमते हो,
दुकानो मे सिर्फ चलते हो
दुनिया एक दुकान है,
इन्सान तो एक सामान है,
काम तो एक बहाना है,
मुकाम तो एक दिन उपर जाना है
कौन कैह्ता है तुम कुछ करते हो,
तुम तो ताश के एक पत्ते हो,
समय आने पर निकलते हो
राम मनोहर
03 May 2006
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