In between birth and death

Struggling to achieve unwanted goals, and walking to reach undecided destination

निकल आएंगे वह रास्ते – nikal aaenge wah raaste March 1, 2006

Filed under: मेरी कविताए,Hindi — rammanohar @ 3:20 pm

निकल आएंगे वह रास्ते

~~~~~~~~~~~~~~~~~

 

रास्ते बहुत कठीन है,

बचे बहुत कम दिन है,

करना है बहुत बाते,

निकलेंगे कितने ऐशी राते,

 

सोच्ना नही है अब ज्यादा,

काम बहुत पडा है ज्यादा,

करने की अब जल्दी है,

सुरु मैने अब करदी है,

 

दिलमे उठे है ए तूफन,

थमना नही है अब के बार,

बढते जाना है तब तक,

मंजील नही मिलेगी तब तक,

 

कुछ चिजो कि जरूरी है,

सोचने कि थोडी जरूरी है,

नही डरने कि मज़बूरी है,

 

जब सामने चलेंगे डटके,

निकल आएंगे वह रास्ते,

और मिलेंगे मजिंल कुछ हटके

 

राम मनोहर

(3.40 AM, 12-2-2006)

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One Response to “निकल आएंगे वह रास्ते – nikal aaenge wah raaste”

  1. amijha Says:

    Thanks Ram Manohar for sending me the link for hindi writing.
    Thanks Again 🙂


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