In between birth and death

Struggling to achieve unwanted goals, and walking to reach undecided destination

Bhool Gaya Tha woh din !!! भूल गया था वोह दिन April 24, 2006

Filed under: मेरी कविताए,Hindi,Uncategorized — rammanohar @ 11:30 am

भूल गया था वोह दिन,
आज फिर याद किउ आ रहा है,
बात क्या है ऐसी,
यह मुझे बता रही है,
राज क्या है ऐसि,
जिन्दगी छुपा रही है

समय ऐसे निक्ला,
बरश हो गए छोटा,
नही था उसे मिल्ना,
पास भि है जब इतन,
भूल गया था वोह दिन,
आज फिर याद किउ आ रहा है

तस्वीर थी उस्की धुन्धली,
साफ अब किउ हो रही है,
भूल गया था चेहरा,
सामने किअ आ रहा है

सम्भल गया था मन,
अब पागल फिर किउ बन रहा है,
छोड दिया था मुडना,
अब रास्ता किउ बना रहा है,
शान्त पडी थी धदकन,
अब बेचैन किउ हो रहा है

 Ram Manohar

24 April 2006

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One Response to “Bhool Gaya Tha woh din !!! भूल गया था वोह दिन”

  1. vishal sirsat Says:

    wah! wah!
    yeh shaayari………………mujhe lagta hain ki……………ise maine kahi padha hain…………..haaaaaaaaaaaaaan yeh to mirza ghalib ki shaayari hain


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