In between birth and death

Struggling to achieve unwanted goals, and walking to reach undecided destination

तुम तो ताश के एक पत्ते हो !! Tum toh taash kay ek pattay ho !! May 3, 2006

Filed under: मेरी कविताए,Hindi — rammanohar @ 2:05 pm

कौन कैह्ता है तुम कुछ करते हो,
तुम तो ताश के एक पत्ते हो,
समय आने पर निकलते हो

समय सब से बलवान है,
बाकी सब बेईमान है,
दुनिया के रङमन्च मे,
हम एक रोल निभाते है

यह् मत सोचो तुम कुछ करोगे,
हाथ पकड के वोह् करायेगा,
हाथ मे जंजीर लगायेगा,
फिर अपनी चाल चलायेगा

सोचो तुम अभी क्या हो,
जबाब तुम्हे यह् मिलेगा,
तुम तो एक सिक्का हो,
हातो हातो घुमते हो,
दुकानो मे सिर्फ चलते हो

दुनिया एक दुकान है,
इन्सान तो एक सामान है,
काम तो एक बहाना है,
मुकाम तो एक दिन उपर जाना है

कौन कैह्ता है तुम कुछ करते हो,
तुम तो ताश के एक पत्ते हो,
समय आने पर निकलते हो

राम मनोहर
03 May 2006

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