In between birth and death

Struggling to achieve unwanted goals, and walking to reach undecided destination

Naach rahe hai maihfil !! नाच रही है मैहफिल August 10, 2006

Filed under: मेरी कविताए,Hindi,Poem — rammanohar @ 10:02 pm

आज इतने रंगीन फिजा है
इस्क मे बेह्क जाने को दिल करता है !!

भरी पडीं है मैयखाना
मदिरा के प्याला मे डुब ने को जी करता है !!

नशे मे है सारी दिशाये
मैयखाना मे पिघलजाने को मान मचलता है !!

नाच रही है मैहफिल
बैंहकी फिंजा मे झुमने को दिल करता है !!

आँखे ढूढ रहीं है किसी को
हूस्न के बाहो मे मचल्ने को दिल करता है !!

कबतक हम ऐसे बचते रहेंगे
किसी शमा के हातो लुटने को दिल करता है !!

राम मनोहर
15 July 2006

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